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अजमेर : कुबूल ए दुआ (राजस्थान सीरीज पार्ट 6)

#पर्यटन_सीरीज
#षष्ठम

मेवाड़ से थोड़ा हटके अबकी ले चलते है 'पृथ्वीराज' की नगरी .....

अजमेर,मुगल भारत के नक्शे में अजमेर की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐतिहासिक अजमेर भारत और विदेश से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करती है। जिसे ग्रीन-कार्पेट पहाड़ियों में परिवार पवित्र शहर भी कहा जाता है।

शुरू करते हैं , अजमेर पहुंचने से पहिले ही देख लेना .. 'नारेली' का 'जैन मंदिर' ,अद्भुत से भी अद्भुत जगह है ,बहुत लंबा चौड़ा परिसर ..अंदर शांत चित्त होकर महावीर स्वामी को तकना और फिर बाग़ बगीचे देखके जो सुकून मिलेगा ,तृप्ति सी मिलेगी,हटके बात है..यहाँ ऊपर पहाड़ी पर 14 मंदिर है थोड़ी थोड़ी दूरी पर ,हिम्मत हो तो जाना ,बहुत खूबसूरती से तराशा गया है । अब आगे 'बिरला सिटी वाटर पार्क' आएगा ,बहुत सुंदर जगह है, मस्ती करने लायक । अब पहुंच जाना 'अजमेर शरीफ दरगाह' ,बहुत प्रसिद्ध संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है,जो हमेशा से बहुत मान्यता रखती है,पहले अकबर भी सपत्नीक बेटे के लिए हर साल दुआएं मांगने आगरा से अजमेर पैदल आते थे और आज भी कई हस्तियां वहां मन्नत मांगने आया करती है । यहाँ बहुत बड़ा गेट है जो हैदराबाद के निजाम ने चढ़ाया था । अंदर बड़े बड़े 2 3 हॉल है , बड़ी देग और छोटी देग का प्रसाद खाना भी पुण्याई माना जाता है । हर साल उर्स में बहुत भीड़ उमड़ती है ,यहाँ बाहर किसी भी अनजान के चक्कर में न पड़े ,अगर 'सोहन हलवा' पसन्द हो तो ले जाएं । फिर थोड़ा सा पैदल चलना तो आएगी 'आना सागर झील' जहाँ पाल पर पांच 'बारादरी' है जहाँ बैठ के आना सागर झील की सुंदरता देखी जा सकती है ,या बोटिंग कर लीजिए । पास ही 'दौलत बाग़' है जिसे सुभाष गार्डन के नाम से भी जाना जाता है ,घूमना । आसपास ही है 'अकबरी मस्जिद' और 'अकबर का महल और संग्रहालय' जोकि शहजादे सलीम का ठिकाना हुआ करता था , देख आना थोड़ा मुग़लई इतिहास और राजपूती शैली का सामंजस्य । यहाँ से जाना 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' जो पहले संस्कृत विद्यालय था और फिर मुस्लिम शासकों ने इसे तुड़वा कर ढाई दिन में इमारत बनवायी थी,इसलिए इसका नाम पड़ा अढ़ाई दिन का झोपड़ा ,अभी भी यहाँ अंदर जाने पर राजपूत शैली दिखाई देगी | अब जाना 'सोनी जी की नसियां' और झील ..अंदर जो स्वर्ण नगरी देखोगे,आँखे खुली सी रह जाएगी । अब यही से निकलना 'तारागढ़ किला' देखने,जिसे चौहानों के राजा अजयपाल ने बनवाया था ,रास्ते में ही पड़ेगा 'पृथ्वीराज स्मारक'  जो गौरव का प्रतीक है । तारागढ़ किला जिले की सुरक्षा करते हुए जिस प्रकार बना हुआ है ,काबिले तारीफ़ है ,यहीं है दर्शन लायक है 'चामुंडा मंदिर' ,थोड़ा आगे बढ़ोगे तो मिल जाएगा 'भीम बुर्ज और गर्भा गुंजन' । अब घूमोगे 'सरकारी संग्रहालय' ,फिर जाना राजाओं और हस्तियों के बालकों के पढ़ने की जगह 'मेयो कॉलेज' और 'संग्रहालय' । यही हैं 'फोय सागर झील' जो कृत्रिम है पर है ख़ास । फिर जाना 'अम्बे माता मंदिर' और घूमते फिरते 'दिल्ली गेट' , 'बुलंद दरवाजा' ,' तुसारी गेट' और 'आगरा गेट' में से निकल आना और चले जाना 'शाहजहां की मस्जिद' और 'अब्दुल्ला खान का मकबरा' ....

अब सफर शुरू करना 'आर्कियोलोजिकल संग्रहालय' से ..फिर जाना 'भरतपुर संग्रहालय' ....इतिहास जानकर थोड़ा खुश थोड़ा आश्चर्य से भरे हुए होंगे तो 'रोइंग झील' भी सुकून देगी ,और फिर 'वार स्मारक' की तरफ से निकलते हुए 'रँगथस्वामी मंदिर' पहुंचना ...अबकी जाना 'तरणताल' और 'राजीव स्मृति वन' ..पहुंचोगे 'रैली तीर्थ' तो लौटना 'ककारखा' की ओर...फिर चलते जाना 'लूणी नदी' के किनारे होंठो पर नमक सा अहसास लिए ,और पहुंच जाना 'क्राफ्ट संग्रहालय' ,देखना 'दाहरसेन स्मारक' .... 'महादेव मंदिर' सुकून देगा ।

अबकी 'भागचन्द की कोठी' भी घूम लेना और 'रानी महल' भी ....थोड़ा आराम करके जाना 'सोला खम्बा' ...वहीं पास ही मिलेगा 'दुर्गा पार्क' ...फिर जाना 'सैंट मेरी के कब्रिस्तान' की ओर ..सबसे निपट के निकल जाना 'नौसर घाटी' वहीं मिलेगा 'महाराणा प्रताप स्मारक' और 'नौसर माता मंदिर' ...अब निकल पड़ना 'आन्टेड की माता मंदिर' ....

इतना सब दिखा के 11 किमी पर जो है 'पुष्कर' वो देखे बिना जाना बेईमानी है...रिसॉर्ट्स,कैंप्स,मौज मस्ती सब यही मिलेगा ..जब पुष्कर मेला लगता है या होली होती है तब तो अलग ही आनंद होता है यहाँ ...देसी-विदेसी सब एक ही रंग में । पुष्कर में है विश्व प्रसिद्ध 'ब्रह्मा मंदिर' ,ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर ... इन्हीं रास्तों पर 'बाज़ार' आकर्षित करेगा ,तो भर लेना झोला । यही है 'पुष्कर घाट' ,चले जाना ,करना अठखेलियां पक्षियों संग । 'वराह मंदिर' और 'रंगजी मंदिर' घूमना और हो सके तो 'ऊंट की सवारी' जरूर करना ,अब धोरे आके रेगिस्तान के जहाज न घूमे तो क्या ही किया ...थोड़ा अजमेर की ओर बढोगे तो आएगा 'ब्रह्मा जी' की पत्नी का मंदिर 'सावित्री मंदिर' ,जहाँ रोपवे से जाना पड़ता है । 'मनमहल' , 'नाग पहाड़' होते हुए 'अटल छत्र हनुमानेश्वर' भी देख लेना ।

अबकी बारी आई ..'नसीराबाद' की ..यहाँ 'एम एच रोड' जोकि आर्मी का एरिया है वो घूमने की अच्छी जगह है ,फिर जाना खाने प्रसिद्ध 'चव्वनीलाल हलवाई' का 'कचौरा' , कचौड़ी तो सबने तकरीबन खा रखी होगी ,पर ये कुछ अलग है ।

फिर चल पड़िए 27 किमी 'किशनगढ़' की ओर ,जहाँ अजमेर का 'हवाईअड्डा' है । यहीं है राजस्थान की 'सेंट्रल यूनिवर्सिटी' और 'तिलोनिया'ज् बेयरफुट कॉलेज' । यहाँ घूमने को 'किशनगढ़ किला' है जिसे किशनसिंह जी ने बनवाया था ,पास ही 'फूल महल पैलेस' है जो हेरिटेज होटल बना दिया गया है इसी के अंदर 'सुमेर निवास' और 'लक्ष्मी नारायण मंदिर' देखने लायक है , यही है 'गुंडालाओ झील' जो किले से दिखने में बहुत खूबसूरत हुआ करती थी ,पर अब देखरेख की कमी की वजह से काफी गंदगी है । फिर जाना 'हमीर सागर' , 'खोड़ा गणेश मंदिर' ,और देखना 'बणी ठणी' (राजस्थान की मोनालिसा कहे जाने वाली प्राचीन चित्रकारी, राजा सामंत सिंह के दरबार में कवियत्री का नाम बणी ठणी था) ... अब बढ़ना 'मोखम विलास' की ओर ...फिर 'स्टूडियो किशनगढ़' भी अच्छा ऑप्शन है .... 'नवग्रह उर्फ़ नाइन प्लैनेट्स मंदिर' , 'श्री निम्बार्क पीठ' और 'पितंबर जी की गाल' जाना सार्थक रहेगा ...अब 'सुख सागर' की ओर सुख की प्राप्ति करना ,वहीं से 'चार बुर्जा किला और बालाजी मंदिर' देखने निकल जाना (ग्रेट वाल ऑफ़ किशनगढ़) । 'मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड' जहाँ काफी फिल्मों की शूटिंग हुई है ,वहां निकल जाना ,फोटोशूट लायक जगह है ... जाओगे जब 'ठाकुर जी मंदिर' , 'सांवत्सर' में तो असीम आनंद मिलेगा, फिर निकल जाना 'खातोली' में 'नाका वाले बालाजी' आशीर्वाद लेके पहुंच जाना , 'नेफेलाइन साइनाइट' जो जियोटूरिज्म के 32 जियोलॉजिकल मॉन्यूमेंट्स में से 1 है,और बहुत ख़ास है । वही कुछ किलोमीटर पर 'रूपनगढ़ फोर्ट' है जिसे अब होटल में तब्दील कर दिया गया है पर अभी भी बहुत सुंदर है...

अब मेट्रो सिटीज की याद में कुछ खाना पीना हो जाए - 'hard rock' , 'baba रेस्त्रां' , 'laura's कैफ़े' , 'the laughing buddha cafe' , 'mango masala रेस्त्रां' , 'ganga laffa and felafel रेस्त्रां' , 'कैफ़े nature's blessing' , 'inbox रेस्त्रां एंड कैफ़े' , 'लिटिल तिब्बत गार्डन रेस्त्रां' , 'फंकी मंकी कैफ़े' , 'कैफ़े CSM' ...कुछ अमीरी में 'शीश महल' , 'रंगमहल' , 'ओलिव किचन एंड अरेबियन नाइट्स' , 'लेक कैफ़े' , 'डेजर्ट रोज़ कैफ़े' , 'कॉफ़ी टेम्पल' ।

कुछ पुष्कर के रिसॉर्ट्स भी .. 'अनन्ता स्पा एंड रिसोर्ट' , 'आराम बाग' , 'ग्रीन वैली रिसोर्ट' , 'फुटहिल पुष्कर रिसोर्ट' , 'वेला रिसोर्ट' , 'सत्यम पैलेस' , 'मैंगो ट्री कैंप' , 'regenta रिसोर्ट पुष्कर फोर्ट' , 'the नारायण रिसोर्ट' , 'backpacker panda chand रिसोर्ट' , 'westin रिसोर्ट' , 'heli पुष्कर' , 'the कंट्री साइड रिसोर्ट' , 'प्रताप महल' , 'नारायण फार्म स्टे' , 'भंवर सिंह रिसोर्ट' ।

अब बढ़ते जाओ 'ब्यावर' की ओर तो बीच में झुंझुनू राणी सती की तर्ज पर बसा 'दादी धाम' बड़ा ही मनमोहक है ...यहाँ 'चांग' में किला और धूनी देखने जाना ,फिर सुकून में 'कल्पवृक्ष' देखने 'मांगलियावास' निकल जाना .. 'बलाड़' में 'वीर हनुमान' पूजने जाना,अबकी 'बिराठिया' का 'बाबा रामदेव मंदिर' देखोगे तो 'दादावाड़ी' में 'आशापुरा माता मंदिर' भी देखने जाना है । 'माताजी की डूंगरी' 'ज्वालामुखी' मैया को मन में बसा के निकल जाना ब्यावर सिटी ,वहां देखना 'विट्ठल टावर' , 'डिक्सन छतरी' , 'ब्रह्मानन्द धाम' ..अब 'अजमेरी गेट' से 'मेवाड़ी गेट' की ओर जाओगे तो 'एकता सर्किल(भारत माता) देखने लायक है और यही पास 'महादेव की छतरी' भी....फिर जाना 'shoolbread मेमोरियल CNI चर्च' जोकि राजस्थान का पहला चर्च है । अब 'गोरधन नाथ(श्री नाथ) के दर्शन करके निकल जाना 'श्यामगढ़' ..किला और 'स्याण माता' को निहार लौटते टाइम आना 'संकट मोचन हनुमान' ..इधर से जाओगे जब 'शांतिनाथ जैन मंदिर,पाली बाजार' तो 'नृसिंह मंदिर' और 'नौसरा माता' को मत भूलना । 'राजियावास' में 'तालाब' किनारे 'शिव मंदिर' देखोगे तो मन विह्ल होगा फिर प्राचीन विष्णु मंदिर 'रंगजी मंदिर' को तकते रहने में मजा आएगा । अब 'नीलकंठ महादेव' , 'शिवपुरा महादेव' , 'डूंगरी महादेव' , 'जालिया तालाब' , 'मकरेड़ा तालाब' और 'बिचडली तालाब' जैसी छोटी छोटी जगह है ,जहाँ जाना व्यर्थ न है । किला प्यारे 'झाक लूलवा'  और 'बौरवा खरवा' जाकर सुकून पाएंगे ।

'टॉडगढ़' में 'दूधलेश्वर महादेव' भी ख़ास है ,पानी में डूबे भगवान मन मोह ही लेंगे
बहुत लंबा चौड़ा पोस्ट है और 1 हफ्ता लेट भी है ,इसके लिए बहुत लंबा खेद है ,उलझनों से निकल अब आनंद लीजिये ...फिर अगली बार मिलेंगे किसी अनजान राह पर जाने पहचाने रास्तो में ..खम्मा घणी ।।

पिकवा आभार - गूगलवा और हमाये प्रिय मित्र


#घौघड़

फोय सागर

ढाई दिन का झोपड़ा

दीवान जी की नसियां

तारागढ़

आना सागर

आना सागर

फूल महल

मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड


 नारेली मंदिर
सावित्री मंदिर

मोखम विलास

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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