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हिल स्टेशन का फन: माउंट आबू (राजस्थान सीरीज पार्ट 8.1)

#पर्यटन_सीरीज
#अष्ठम
#पार्ट_फर्स्ट

अब निकल चलते हैं देवनगरी की तरफ ... 'सिरोही' जिला पहाड़ियों और चट्टानी पर्वत से दो भागो में बंट गया है। शुरू करते हैं 'आबू रोड' से ..क्योंकि जब दिल्ली या जयपुर से जाओगे तो स्टेशन वही पड़ेगा ,और यही तो है राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन 😀

आबू रोड उतर के आसपास ढूंढ़ लेना बसेरा और वहीं खाने को भी अच्छा और किफायती मिल जाएगा ।  अब जाना 'माउंट आबू' जो 30 किमी है बस ...माउंट आबू से ढाई किलोमीटर पर 'दिलवाड़ा जैन मंदिर' है जोकि पांच मंदिरों का समूह है 'विमलशाही','लुणवशाही','पीत लहर','खरतरवशाही','महावीर स्वामी'और 'कुंथुनाथ' और बहुत अद्भुत है, 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बना था ,दिलवाड़ा मंदिर अपनी जटिल नक्काशी की वजह से प्रसिद्ध है। यह मंदिर बाहर से बहुत ही साधारण दिखाई देता है लेकिन जब आप इस मंदिर को अंदर से देखेंगे तो इसकी छत, दीवारों, मेहराबों और स्तंभों पर बनी हुई डिजाइनों को देखते ही आकर्षित हो जायेंगे। फिर बढ़ना 'नक्की झील' की ओर ,नक्की लेक भारत की पहली मानव निर्मित झील है जिसकी गहराई लगभग 25 मीटर और चौड़ाई एक मील है। माउंट आबू के केंद्र में स्थित यह आकर्षक झील हरे भरे पहाड़ों, पहाड़ों और अजीब आकार की चट्टानों से घिरी हुई है। माउंट आबू की उड़ने वाली हवाएं और सुखदायक तापमान में बोटिंग  करना आपके दिल को खुश कर देगी। यही हैं 'गांधी घाट' और 'भारत माता मंदिर' है । अब जाओगे पास ही 'रघुनाथ मंदिर' ,650 साल पहले नक्काशीदार मूर्ति के साथ बना हुआ मंदिर पृथ्वी का सबसे पवित्र मंदिर कहलाता है । फिर जाना 'bailey's walk' में विचरण करने और वहीं से 'चंपा गुफा' जहाँ विवेकानंद ठहरे थे । 'क्रोकोडाइल पार्क' भी देखने लायक जगह है । 'ज्ञान सरोवर रोड' पर 'दादी वन जंगल पार्क' जाना ,फिर 'दुलेश्वर महादेव' निकलना ... 'वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल म्यूजियम' भी जाकर आना ।

सुबह निकलना 'यूनिवर्सल पीस हॉल' जोकि 'ब्रह्मकुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय' में स्थित है ,यहां शांति के लिए जाइएगा 😅 यही है 'ब्रह्मकुमारी आश्रम', 'तपस्या धाम' और 'पीस पार्क' ,उनके दर्शन में मन रम सा जाएगा । फिर जाओगे 365 सीढ़ी पार करके गुफा वाले 'अर्बुदा देवी/आधार देवी कात्यायनी मंदिर' जो चट्टान पर बना हुआ है , यही है 'स्काईफॉल पॉइंट' ,अब इसी रोड पर वापसी में 'स्वामीनारायण मंदिर' जाना । फिर निकल जाना 5 किमी दूर 'ट्रैवर्स टैंक' ..जंगल में हसीन नज़ारे । शाम को सबसे प्यारा सूर्यास्त देखने निकल जाना 'सनसेट पॉइंट'।

'रसिया बालम/कुंवारी कन्या' का मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित सच्ची घटना पर आधारित है,जिसके लिए अलग से लिखी जाए एक पोस्ट तब बात बनेगी फिर जब जाओगे 'टॉड रॉक' तो आएगा मजा,झील और हरा भरा उबड़ खाबड़ मैदान । 'गौमुख मंदिर' के लिए 700 सीढियां चढ़ना और 1 किमी ट्रैकिंग ,वो भी हरियाली में ,आनंद । 'flaggy स्टेचू ऑफ़ क्राइस्ट द रेदीमर' भी एक पहाड़ी पर स्थित है,जाइएगा और टाइटैनिक पोज़ में फोटो खिंचवाएगा , फिर 'हनीमून पॉइंट' पर भी सूर्यास्त के नजारे अच्छे दिखेंगे ।

अब सुबह सुबह निकलना 'गुरु शिखर' की ओर..अगर आप शहर के तेज और व्यस्त जीवन बोर हो गए है तो गुरु शिखर आपके लिए सबसे अच्छी जगह है । यह राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी जोकि समुद्र तल से 1722 मी है ... यहाँ 'गुरू दत्तात्रेय मंदिर और गुफा' है जोकि विष्णु भगवान को समर्पित है और साथ ही 'आबू वैधशाला' भी है जहाँ इंफ्रारेड टेलिस्कोप है । अब निकलना 'माउंट आबू अभयारण्य' की ओर , इस पूरे क्षेत्र को वनस्पतियों और जीवों को संरक्षित करने के लिए एक वन्यजीव अभयारण्य बनाया गया था। यह अभयारण्य एक ऐसी जगह है, जिसमे सदाबहार जंगलों की जीवंत वनस्पति पाई जाती है।

अब निकल जाना 'अचलगढ़' की ओर, पहाड़ी पर 'किला' देखना, 'अचलेश्वर महादेव' को पूजना जिनका अपना अलग रहस्य है ,कहते है कि शिवजी के पैर के अंगूठे पर टिका हुआ है पूरी पहाड़ी और यहाँ पैर के अंगूठे की पूजा होती है और 'काशीनाथ शांतिनाथ जैन मंदिर' देखना । वहां कुछ अलग दिखेगा ,3 भैंसों की मूर्तियां ,जाओगे तो देखना ।

कुछ खाने पीने की जगह जाइए जायका चखने 'अबुर्दा रेस्त्रां', 'आशापुरा होटल' , 'संकल्प रेस्त्रां' , 'माउंट व्यू होटल' , 'गोपाला रेस्त्रां' और 'चाचा कैफ़े' ।
थोड़ा पार्टी मूड में जाओ तो 'ब्लैक पॉट बार एंड लाउन्ज' , 'tobak लाउन्ज' , 'risa बार एंड लाउन्ज' , 'शम्भू की कॉफी' ।

अब आबू से बाहर आने की बारी है ,बाकीं सिरोही भी बहुत सुंदर है .. पर लंबे लंबे पोस्ट आप कम ही पढोगे इसलिए दूसरे पार्ट का कल तक इंतेजार कीजिए । तब तक के लिए राम राम ।।

पिकवा आभार - गूगल

#घौघड़
टॉड रॉक

 नक्की झील                             
दिलवाड़ा टेम्पल


                         
ट्रैवर्स टैंक
                             
गुरु शिखर

रघुनाथ मंदिर

अचलगढ़

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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