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बरसात का मजा @सिरोही (राजस्थान सीरीज पार्ट 8.2)

#पर्यटन_सीरीज
#अष्ठम
#पार्ट_टू

इस बारी हम शुरू करेंगे करीब 2500 वर्ष पुरानी 'गणेश जी की मूर्ति' जोकि पर्वत पर प्राकृतिक रूप से निर्मित है, 'मगरीवाड़ा' में है,उसी के नीचे 'प्राकृतिक गुफा' भी है  ,वहीं पास है 'श्री बाँण माताजी पर्वत' है ,दर्शन करके एक अलग अनुभूति होगी ।

'अखंड भगवान श्री रामचंद्र मंदिर' की तरफ जाके निकल पड़ना 'बाजणा गणेश' की ओर...

अब जो देखोगे 'सिरोही' का 'किला' ,अद्भुत लगेगा । फिर जाना 'सरकारी संग्रहालय', राजभवन प्रांगण में स्थित यह संग्रहालय कई भागों में विभाजित है। पहले हिस्से में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हथियार, वाद्य यंत्र, महिलाओं के गहने और वस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। संग्रहालय का मुख आकर्षण 6ठीं से 12वीं शताब्दी के बीच की देवदासी या नर्तकियों की मूर्तियां, चक्रबाहु शिव की प्रतिमा, 404 प्राचीन मूर्तियों का संग्रह और विष कन्या की प्रतिमा शामिल है। 'सर्किट हाउस' से 1 किमी दूर 'सर्वधर्म मंदिर' है ,वो जरूर जा आना । 'गाजण माता मंदिर' भी प्राचीन है और दर्शनीय है ।

अब निकल पड़ना 'चंद्रावती' की ओर जो आबू रोड से 6 किमी. दूर है । इसका वर्तमान नाम 'चंदेला' है। यह नगर सभ्यता, वाणिज्य और व्यापार का मुख्य केंद्र था। चूंकि यह परमारों की राजधानी था इसलिए सांस्कृतिक रूप से यह बहुत समृद्ध था। चंद्रावती तत्कालीन वास्तुशिल्प का बहुत अच्छा उदाहरण है। 1972 में सिरोही में आई बाढ़ से इसके कई अवशेष बह गए या टूट गए। बाद में उन्हें 'आबु संग्रहालय' में सुरक्षित रख दिया गया। यही है 'कृष्णगंज' में 'पावापुरी धाम' जिसमें 'श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ' के दर्शन होंगे ।

फिर जाओगे 'मीरपुर मंदिर' जिसकी तर्ज पर रणकपुर और दिलवाड़ा मंदिर बसे है ।  मंदिर के बारे में माना जाता है कि संगमरमर से बना यह राजस्थान का सबसे पुराना स्मारक है। वर्तमान में इसका मुख्य मंदिर अपने उसी रूप में खड़ा है जिसके स्तंभ और नक्काशी भारतीय पौराणिक मान्यताओं से रूबरू कराते हैं।

अब निकल पड़ना 'सारणेश्वर'/'सर्नेश्वर' की ओर ,मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की प्रतिमा ओर 108 शिव लिंगों का धारण किए एक प्लेट रखी है। मुख्य मंदिर के बाहर मंदाकिनी कुंड है जहां कार्तिक पूर्णिमा, चैत्र पूर्णिमा और वैसाख पूर्णिमा के दिन भक्त पवित्र स्नान करते हैं। विक्रम संवत भद्रपद माह में यहां उत्सव का आयोजन किया जाता है ।

आबू रोड से 45 किमी दूर अतीत का समृद्ध शहर है 'वर्मन' जहाँ 'वर्मन सूर्य मंदिर' स्थित हैं और 'श्री वरमाण जैन मंदिर' है ।

'पिंडवाड़ा' में 'महावीर जैन मंदिर'  और 'जे के लक्ष्मी और बिनानी सीमेंट' की फैक्ट्री है , पास में 'बसंतगढ़' में 'सरस्वती नामक नदी' है और 'वता या वशिष्ठपुर' गाँव भी दर्शनीय है ।  3 किमी दूर 'गोपेश्वर महादेव' के दर्शन कर निकलना 2 किमी दूर 'अजारी' गाँव में 'मार्कंडेश्वर महादेव' का दर्शन मनमोह लेगा और 'जैन मंदिर' भी घूम आना ।

'अनादारा' में 'संघवी भैरूँ तारक(तलहटी)' जिसका रास्ता नक्की झील से होकर भी जाता है ।
आबू डाउन से 4 किमी है 'करौदी ढाज मंदिर' जो सूर्य का मंदिर है ,अनादारा से 32 किमी .. यह जगह अबू पहाड़ी के घोड़े के जूता केंद्र बिंदु पर स्थित है ।

पास में 'मधुसूदन - विष्णु मंदिर' ,वहां बहुत आश्चर्य से भर देने वाला पर्यावरण पर आधारित लेख लिखा हुआ है ,फिर 'टोस गेट' से होकर 'मुद्गलेश्वर महादेव' जाइएगा । अब 'मुंगथला वियनता' का 'महावीर मंदिर' और 'पटनारन मंदिर' है ।

सिरोही से शेओगंज तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 14 के साइड ट्रैक पर सिरोही के उत्तर में छः मील की दूरी पर एक जगह देवी 'अम्बा जी मंदिर' के लिए प्रसिद्ध है। 'कोलारगढ़' 2 किमी की दूरी पर पूर्वी तरफ की ओर स्थित है। गणेश ध्रुव पर पुराने किले के अवशेष यहां देखे जा सकते हैं। एक धर्मशाला, लक्ष्मी नारायण मंदिर, शिव मंदिर और गोरखनाथ स्थित है। 'कोलारगढ़' जैन तीर्थ भी यही है । 400 कदम चढ़ाई के बाद पहाड़ी पर भगवान शिव का 'अम्बरेश्वर' प्राचीन मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और झरने के साथ अद्भुत परिवेश के साथ देखा जा सकता है। पूरा क्षेत्र सिरेनवा पहाड़ियों का हिस्सा है और प्रशंसनीय जीवों और वनस्पतियों के साथ खूबसूरत घने जंगल का आनंद लिया जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि पुराने शहर और कोलार के किले के अवशेष परमार शासनकाल का है।

'अठारह जैन मंदिर' की सड़क के एक ही पंक्ति में स्थित हैं। कुछ मंदिर आर्किटेक्ट व्यू पॉइंट से शानदार, विशाल और महत्वपूर्ण हैं। उच्चतम मंदिर चौमुख जैन के पहले तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है। इस मंदिर का ढांचा खंभे पर खड़े रणकपुर के समान है। यह सिरेनवा पहाड़ियों की पश्चिमी ढलान पर स्थित है और 78 फीट ऊंचे शिखर (शिखर) द्वारा दर्शाया गया है।
मंदिर सिरोही से बहुत दूर से देखा जा सकता है। मंदिर के ऊंचे शीर्ष पर बैठकर, सूरज सेट का दृश्य, खेतों की प्राकृतिक सुंदरता और सिरोही शहर और आसपास के स्थानों के परिदृश्य का आनंद लिया जा सकता है।

'सारन का खेड़ा' में 'जीरावाला पार्श्वनाथ' के दर्शन कर 'श्री दियाणा जी' चले जाना और फिर 'बमनवाड़ा तीर्थ' भी चले जाना । 'सिवेरा' और 'उंदरा' में भी काफी सुंदर मंदिर है । 'सुंधामाता', 'भूतेश्वर जी' 'भूतगांव' जाना और फिर 'मण्डवारिया' में 'मल्लेश्वर महादेव' के दर्शन करके सुखद अनुभूति होगी ।

'पालड़ी' में 'श्री वाराही माताजी मंदिर' घूमना,फिर निकलना 'मातर माताजी मंदिर' ... 'झाड़ोली-वीर' में 'वोवेश्वर महादेव' आपको सुखद अनुभूति देंगे ।

'आबू रोड' पर 'ओर गाँव' में 'अतिप्राचीन श्री विट्ठल भगवान मंदिर' शानदार लगेगा ,तो फिर 'वासा' गाँव भी घुमा जा सकता है ।

'गोयली' में 'खैतलाजी महाराज' और 'खिमज माता' घूम आओगे तो 'अर्बुदा रेस्त्रां' में खाना खाना ,फिर 'वराडा' में 'हनुमान मंदिर' जाकर 'मंडार' में 'लीलाधारी महादेव' के दर्शन करना ।  'हरणी दांतराई' में 'जागेश्वर महादेव मंदिर' जाओगे और फिर  'खेतलाजी मंदिर और सिन्द्रथ गोगाधाम' के दर्शन कर ,निकल जाना 'वाण',वहां 'वैजनाथ महादेव' और 'सैनजी दाता मंदिर' को पूजना ।

'वासाड़ा' में 'गंगा धाम' जाकर 'असावा' के 'देवक्षेत्र महादेव तीर्थ धाम' और 'श्री सदका माताजी मंदिर' में दर्शन करना ।
फिर 'कालन्द्री' में 'साईं बाबा' , 'शनि धाम' , 'हडमतिया हनुमान जी' और 'ब्रह्म जी मंदिर' घूम के 'मडिया' के 'जागेश्वर महादेव' जाओगे तो आनन्दित हो जाओगे ।।

चूँकि सिरोही में काफी जैन मंदिर और महादेव के मंदिर है तो इनके भक्तों को काफी पसंद आएगा । बाकी बारिश के मौसम के बाद बहुत सुंदर हो जाता है हमारा सिरोही । अब अगले जिले की ओर अगले हफ्ते बढ़ेंगे तब तक के लिए घणी खम्मा और मआआफी इतनी देर के लिए 😬

पिकवा आभार - गूगल

#घौघड़

  मीरपुर मंदिर
                         
जीरावाला पहाड़ी
                         
मगरीवाड़ा
                             
सर्वधर्म मंदिर,सिरोही

अम्बरेश्वर मंदिर
                           
पावापुरी धाम

सर्नेश्वर मंदिर

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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