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गुलाब का हलवा @पाली (राजस्थान सीरीज पार्ट 7)

#पर्यटन_सीरीज
#सप्तम

अब थोड़ा औद्योगिक नगरी की ओर निकल चलते हैं ... और गुलाब हलवे के कारण जाना जाता 'पाली' है भई जाना जाता 'पाली' है...तो उठ चालो 'बांदी' नदी के किनारे बसी पालीवाल ब्राह्मणों की बसाई नगरी ...

शहर के दिल में ही बसा है 'सोमनाथ मंदिर' जिसकी ऐतिहासिक और शिल्पआर्ट के दीवाने दूर दूर तक हैं ..पास ही उसके है 'लाखोटिया गार्डन' जहाँ पिकनिक मनाने का मन लेके जाओ ,कतई मौज ही आ जाएगी ..अंदर 'लाखोटिया पॉन्ड' और शिवजी की मूर्ति है ..यहीं से निकल जाना 'श्रीमालियों के बास' जिसे महाराणा प्रताप ने बसाया था ..यही पर है 'महाराणा प्रताप स्मारक' ..फिर जाना 'ब्रह्मपुरी' में बसे 'महालक्ष्मी मंदिर' ...
अब थक चुके हो तो जाना 'गुलाब हलवा वाला' और खाना पाली का फेमस 'गुलाब हलवा' .. फिर जाना 'बांगड़ म्यूजियम और मंदिर' जहाँ राजस्थानी संस्कृति,आदिवासी समुदाय का इतिहास काफी अच्छे से जान पाओगे ।

'श्री नवलखा पार्श्वनाथ जैन मंदिर' जाइये , बना था जब नौ लाख लगे थे इसलिए नाम ही यही पड़ गया ,बहुत अच्छी जगह है ... अब जाओगे 25 किमी दूर 'भाटुन्ड' की तरफ तो पाओगे लूणी नदी पर  'जवाई डैम' तो वहाँ बीच में 'देवगिरी मंदिर' के दर्शन करना,नदी के तट पर 'नीलकंठ महादेव' के और प्रवासी पक्षियों का आने का मौसम हुआ तो 'क्रेन' और 'गीत' पक्षी देखने को मिलेंगे । 'भाटुन्ड' को मंदिरों की नगरी कहा जा सकता है ...  'शीतला माता मंदिर' , 'शनिदेव मंदिर' , 'लक्ष्मी नारायण मंदिर' , 'उभ्रेश्वर महादेव' 'ठाकुर जी मंदिर' , 'क्षेमकरणी माँ मंदिर' , 'चेतन बालाजी मंदिर' , 'रामदेव जी मंदिर' , 'पोरीधार हनुमान मंदिर' , 'बाला हनुमान मंदिर' , 'श्री आशापुरा जी' , ' श्री ब्रह्मा जी मंदिर' , 'सूर्य मंदिर' , 'श्री भद्रेश्वर महादेव' , 'वराई माता मंदिर' , 'आदोर जी महादेव' , 'सती माता दातरी' , 'माता आवारकी' जैसे कई मंदिर है ।

 'कोट्रा' में सादड़ी राजपुरा रोड पर मेवाड़ के अमरनाथ नाम से प्रसिद्ध 'परशुराम महादेव मंदिर और गुफा' है , पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण परशुराम ने अपने फरसे से एक बड़ी चट्टान को काटकर किया था। खास अवसरों पर यहां भक्तों की लंबी कतार लगती है, पहाड़ी पर बसे इस गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 500 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। समुद्र तल से इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 3600 फीट है। जानकारो की मानें तो इस गुफा का निर्माण एक ही चट्टान को काट किया गया है। गुफा का ऊपरी भाग गाय के थन समान प्रतीत होता है। इस गुफा मंदिर के अंदर ही भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। शिवलिंग के ऊपर गोमुख है, जहां से प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। मंदिर के अलावा यहां के 'सादड़ी' इलाके में परशुराम महादव का एक बगीचा भी है। मंदिर से कुछ किमी की दूरी पर 'मातृकुंडिया' नाम का एक स्थान है, माना जाता है कि मातृहत्या के पाप से  परशुराम को यहीं मिली थी। आत्मिक और मानसिक शांति के लिए यह जगह आदर्श मानी जाती है।

अब निकल जाओगे 'बिजापुर गाँव' जो पाली से मात्र 3 किमी है , अरावली की पहाड़ियों में 'हिंगलाज माता' के दर्शन करना । फिर 'सांडेराव गाँव' में 'निम्बा का नाथ महादेव' मंदिर है ,जिसकी बहुत मान्यता है ..यही पांडवों ने 'नवदुर्गा' स्थापित की थी । 'निमाज' में बहुत ही शानदार मास्टरपीस 'माँ दुर्गा मंदिर' है,जोकि 9वीं शताब्दी में बना हुआ है ।  20 किमी दूर 'जादान आश्रम' तो इतनी सही जगह है कि जाके तृप्ति ही मिल जाएगी , ॐ आकार में आश्रम बना हुआ है और खूब सारे मंदिर है ।

अब सबसे प्रसिद्ध जगह 15वीं शताब्दी का 'रणकपुर जैन मंदिर' जाना ,तीर्थांकर आदिनाथ जी का चारमुखी मंदिर है ..यहाँ 24 हॉल है और 1440 पिलर है ,जिसमें हर एक पर अलग कलाकारी की हुई है ,अद्भुत जगह है ,यही पास 'एवरग्रीन वाइल्डलाइफ सफारी' और 'रणकपुर डैम' का भी आनंद लेना। फिर 'खुटानी' में 'खेतालाजी भैरूँ मंदिर' भी देखने लायक है । अब शहर से कुछ ही दूरी पर 'बुलेट मंदिर' जाने की इच्छा तो रखोगे ही , 'ओम बन्ना' का बहुत ही मान्यता प्राप्त मंदिर । पाली से 10 किमी दूर है 'हेमावास डैम' जो की 'मानपुरा भाखरी' पहाड़ी पर बना हुआ है, यहाँ 'दुर्गा माता मंदिर' , 'जबरेश्वर महादेव' और 'पार्श्वनाथ जैन मंदिर है' ।

'रामेश्वर महादेव' , 'राधा कृष्णा एस्ट्रोलॉजिकल हाउस' , 'बजरंग बाग' , 'करणी माता' , 'गीता भवन' , 'साईं बाबा मंदिर' , 'illogi temple' , 'केशव भवन' (जोकि अब संघ का कार्यालय है) कुछ खास सी देखने लायक जगहें हैं शहर में । यही स्थित 'महाराजा श्री उम्मेद मिल्स' सबसे बड़ी टेक्सटाइल मिलों में आती है ।

'सरदार सामन्द लेक' भी खूब सुंदर है । 'सागर शिव मंदिर' , 'रुद्रेश्वर महादेव' , 'पुनाघर भाखरी' , 'हंटूडी रता महाबीर' , 'सूर्य नारायण' देखने जरूर जाना ,इतने मनमोहक दृश्य आप जब आँखों में लेके लौटेंगे अपने घर तो जरूर वापस सफर करने का मन करेगा । 'गंगा गोवर्धन म्यूजियम' से काफी जानकारी पता चलेगी ,फिर जाना 'श्वेताम्भर जैन गोल्डन टेम्पल' ,जब सूरज की किरणें पड़ती है तो सुनहरा रंग निखर ही आता है ।
'रास फोर्ट' में घूमने का अलग मजा होगा, 'राहतगढ़' हेरिटेज जाइएगा ,मनभावन है ।

अब थोड़ा लक्ज़री जाया जाए , 'कैसल बेरा होटल' , 'लक्ष्मण सागर' , 'the amba vilas' , 'महारानी बाग़' जैसे जगह है काफी अच्छी है । 'जीप सफ़ारी' और 'बोटिंग' भी 'कुम्भलगढ़ सारंगवास रोड' पर 'शिल्पी (रणकपुर) में है ।

अब जाइये 'देसूरी' में 'जूणी धाम' और 'सारंगवास' (दोनों में 1.7 किमी का फासला है) में 'सोनाणा खेतलाजी' लोकदेवता के मंदिर ,जोकि बहुत प्रसिद्ध है ,और इन्हीं के नाम पर 'सोनाणा खेतलाजी ट्रस्ट' है जहाँ फायर डांस,क्लासिकल डांस,गैर नृत्य आयोजित किए जाते है । 'गोडवाड़ महोत्सव' हर साल होली पर खूब शानदार तरीके से मनाया जाता है ।

'सोजत सिटी' की मेहँदी खूब प्रसिद्ध है,यहीं से सब जगह निर्यात होती है और यहाँ का परकोटा भी बहुत सुंदर है । यहाँ से गुजरते हुए घाटियां बहुत ही शानदार होती है ।

पाली बहुत ही अद्भुत जगह है ,बारिश के बाद जाने लायक । अब अगली बार आसपास की एक विशेष जगह घुमाएंगे ,तब तक के लिए खम्मा घणी ।

पिकवा आभार - गूगल

#घौघड़

 रास गढ़
                             
रास गढ़

लाखोटिया गार्डन

जादान आश्रम

जवाई डैम

सोजत सिटी

बुलेट मंदिर

सोनाणा खेतलाजी

सोनाणा खेतलाजी

परशुराम मंदिर

रणकपुर मंदिर

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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